भारत सरकार ने अमेरिका (US) के दबाव के बीच डिजिटल विज्ञापन सेवाओं पर लगने वाले 6% ‘Google Tax’ को खत्म करने का फैसला किया है। यह निर्णय वित्त विधेयक 2025 (Finance Bill 2025) में किए गए 35 संशोधनों का हिस्सा है और इसे 1 अप्रैल, 2025 से लागू किया जाएगा। इस फैसले के पीछे कई कारण हैं, जिनमें अमेरिकी दबाव और कर अनुपालन की जटिलता शामिल हैं.

यह ‘Google Tax’, जिसे समान लेवी (Equalization Levy – EL) के रूप में भी जाना जाता है, 2016 में भारतीय व्यवसायों द्वारा विदेशी कंपनियों को डिजिटल विज्ञापन सेवाओं के लिए किए गए भुगतान पर कर लगाने के लिए पेश किया गया था. इसका उद्देश्य उन कंपनियों पर कर लगाना था जिनका भारत में भौतिक उपस्थिति नहीं है, लेकिन वे यहां से महत्वपूर्ण राजस्व अर्जित करती हैं।
‘Google Tax’ खत्म करने के कारण
भारत सरकार ने ‘Google Tax’ को खत्म करने के कई कारण बताए हैं:
- अमेरिकी दबाव: अमेरिका ने इस कर को भेदभावपूर्ण बताया था और भारत पर जवाबी शुल्क लगाने की धमकी दी थी।
- अनुपालन की जटिलता: हितधारकों ने इसे ‘अस्पष्ट’ अनुपालन बोझ पाया।
- वैश्विक सहमति: दुनिया अब इस मुद्दे पर आगे बढ़ चुकी है और एक बहुपक्षीय समाधान की तलाश कर रही है।
किसे होगा फायदा?
इस फैसले से Google, Meta (Facebook), Amazon जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियों को फायदा होगा, जिन्हें अब भारत में डिजिटल विज्ञापन सेवाओं पर 6% कर नहीं देना होगा. इसके साथ ही, भारतीय व्यवसायों को भी फायदा होगा, जिन्हें अब इन सेवाओं के लिए कम भुगतान करना होगा।
भारत सरकार का रुख
भारत सरकार का कहना है कि वह डिजिटल अर्थव्यवस्था पर कर लगाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन वह एक बहुपक्षीय समाधान का समर्थन करती है। सरकार का मानना है कि सभी देशों को मिलकर इस मुद्दे पर काम करना चाहिए ताकि एक निष्पक्ष और प्रभावी कर प्रणाली स्थापित की जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत सरकार का यह फैसला एक व्यावहारिक कदम है। अमेरिकी दबाव के आगे झुकने के अलावा, सरकार के पास कोई और विकल्प नहीं था। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि सरकार को डिजिटल अर्थव्यवस्था पर कर लगाने के लिए अन्य विकल्पों पर विचार करना चाहिए।
भारत सरकार को अब डिजिटल अर्थव्यवस्था पर कर लगाने के लिए एक नया तरीका खोजना होगा। सरकार को अन्य देशों के साथ मिलकर काम करना चाहिए ताकि एक वैश्विक कर प्रणाली स्थापित की जा सके।
