असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने राज्य के धुबरी जिले में सक्रिय एक विशेष समूह के खिलाफ ‘Shoot at Sight’ का आदेश जारी किया है। यह आदेश राज्य में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया गया एक बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री ने यह कदम तब उठाया जब धुबरी में एक विशेष समूह की गतिविधियों से शांति और सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया।

धुबरी में क्यों जारी हुआ ‘Shoot at Sight’ आदेश?
धुबरी जिले में हाल के दिनों में आपराधिक गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक विशेष समूह ने स्थानीय निवासियों को धमकाने और हिंसा फैलाने का काम किया है। इस समूह की गतिविधियों ने न केवल स्थानीय लोगों को डराया है, बल्कि राज्य की कानून व्यवस्था को भी चुनौती दी है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “हम राज्य में किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे। धुबरी में सक्रिय इस समूह के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ‘Shoot at Sight’ का आदेश राज्य में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिया गया है।”
विशेषज्ञों और जनता की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री के इस कदम पर विशेषज्ञों और जनता की मिली-जुली प्रतिक्रिया आई है। कुछ लोगों ने इसे राज्य में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक साहसिक कदम बताया है, जबकि कुछ ने इसे अत्यधिक सख्त करार दिया है।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, “धुबरी में हालात बहुत खराब हो गए थे। मुख्यमंत्री का यह कदम सही समय पर लिया गया है। हमें उम्मीद है कि इससे शांति बहाल होगी।” वहीं, कुछ मानवाधिकार संगठनों ने इस आदेश पर सवाल उठाए हैं और इसे नागरिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है।
असम में कानून और व्यवस्था की स्थिति
असम में हाल के वर्षों में कानून और व्यवस्था को लेकर कई चुनौतियां सामने आई हैं। राज्य सरकार ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं। ‘Shoot at Sight’ का आदेश भी इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
राज्य सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगी। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि राज्य में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि इस आदेश का धुबरी और अन्य क्षेत्रों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
