भारतीय रुपया (Indian Rupee) अमेरिकी डॉलर (US Dollar) के मुकाबले 14 पैसे गिरकर 85.44 पर बंद हुआ। यह गिरावट विदेशी मुद्रा बाजार (Forex Market) में डॉलर की मजबूत मांग और विदेशी फंड के बहिर्वाह (foreign fund outflows) के कारण हुई। रुपये की यह गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन गई है।

रुपये की गिरावट के कारण
रुपये में गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण हैं:
- डॉलर की मजबूत मांग: अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने रुपये पर दबाव डाला। डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापता है, में वृद्धि देखी गई।
- विदेशी फंड का बहिर्वाह: विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजारों से पूंजी निकालने के कारण रुपये पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।
- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता: वैश्विक बाजारों में मंदी और ब्याज दरों में संभावित वृद्धि ने रुपये को कमजोर किया।
- घरेलू बाजार की कमजोरी: भारतीय शेयर बाजार में गिरावट और कमजोर घरेलू आर्थिक संकेतकों ने भी रुपये पर दबाव डाला।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
रुपये की गिरावट का भारतीय अर्थव्यवस्था पर कई प्रभाव पड़ सकते हैं:
- आयात महंगा: रुपये की कमजोरी के कारण कच्चे तेल (crude oil) और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई (inflation) में इजाफा होगा।
- विदेशी कर्ज महंगा: विदेशी मुद्रा में लिए गए कर्ज का भुगतान महंगा हो सकता है।
- निर्यातकों को फायदा: रुपये की कमजोरी से भारतीय निर्यातकों को लाभ हो सकता है, क्योंकि उनके उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सस्ते हो जाएंगे।
भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की स्थिति में सुधार के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को हस्तक्षेप करना पड़ सकता है। इसके अलावा, विदेशी निवेश को आकर्षित करने और घरेलू बाजार को मजबूत करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे।
डॉलर के मुकाबले रुपये का प्रदर्शन
रुपये का प्रदर्शन पिछले कुछ महीनों में अस्थिर रहा है। इससे पहले, रुपये ने 2025 की शुरुआत में 85.64 पर बंद होकर मजबूती दिखाई थी, लेकिन हालिया गिरावट ने निवेशकों को चिंतित कर दिया है।
