राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह (General Secretary) दत्तात्रेय होसबाले (Dattatreya Hosabale) ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस (Press Conference) को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी राय रखी, जिनमें औरंगजेब (Aurangzeb), बांग्लादेश (Bangladesh) में हिंसा, मुस्लिम आरक्षण (Muslim Reservation) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष (President) का चुनाव जैसे विषय शामिल थे। उनके बयानों ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है।

औरंगजेब पर होसबाले की राय

दत्तात्रेय होसबाले ने औरंगजेब के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें इतिहास से सीखना चाहिए, लेकिन अतीत में अटके नहीं रहना चाहिए।

बांग्लादेश में हिंसा पर चिंता

होसबाले ने बांग्लादेश में हाल ही में हुई हिंसा (Violence in Bangladesh) पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में मंदिरों (Temples), मठों (Mutts) और दुर्गा पूजा पंडालों (Durga Puja Pandals) पर हमले चिंताजनक हैं। उन्होंने बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों (Minorities) की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

मुस्लिम आरक्षण पर विचार

मुस्लिम आरक्षण (Muslim Reservation) के मुद्दे पर होसबाले ने कहा कि आरक्षण का आधार जाति (Caste) नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक पिछड़ापन (Social and Economic Backwardness) होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी जरूरतमंदों को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए, चाहे वे किसी भी धर्म (Religion) के हों।

बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव पर प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष (President) के चुनाव पर होसबाले ने कहा कि यह बीजेपी का आंतरिक मामला (Internal Matter) है और RSS इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि RSS सभी राजनीतिक दलों (Political Parties) के साथ समान दूरी बनाए रखता है।

योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन

होसबाले ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ (Divide and Perish) वाले बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अगर हम अगड़ा और पिछड़ा, जाति और भाषा के नाम पर भेद करेंगे तो हम बंट जाएंगे।

भारत को ‘भारत’ कहने की वकालत

होसबाले ने “इंग्लिश-इज्म” (English-ism) का मुकाबला करने और औपनिवेशिक मानसिकता (Colonial Mindset) से बाहर निकलने के लिए भारत को केवल ‘भारत’ (Bharat) कहने की वकालत की।

दत्तात्रेय होसबाले की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए बयानों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर RSS के दृष्टिकोण को स्पष्ट किया है। उनके बयानों से यह पता चलता है कि RSS सामाजिक समरसता (Social Harmony), राष्ट्रीय एकता (National Unity) और सांस्कृतिक मूल्यों (Cultural Values) को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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