केरल सरकार को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है, जब केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) ने वरिष्ठ IAS अधिकारी डॉ. बी. अशोक के ट्रांसफर आदेश पर रोक लगा दी। यह मामला राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बढ़ते तनाव और विवाद को उजागर करता है। बी. अशोक, जो वर्तमान में कृषि प्रधान सचिव के पद पर कार्यरत हैं, को सरकार ने एक अन्य पद पर स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। लेकिन CAT ने इस आदेश को रोकते हुए उन्हें अपने वर्तमान पद पर बने रहने का निर्देश दिया है।


क्या है पूरा मामला?

डॉ. बी. अशोक का ट्रांसफर विवाद पिछले कुछ समय से चर्चा में है। केरल सरकार ने उन्हें स्थानीय स्वशासन सुधार आयोग (Local Self Government Reforms Commission) में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। लेकिन यह आदेश तब आया जब CAT ने पहले ही उनके ट्रांसफर पर रोक लगा दी थी।CAT ने 9 सितंबर को एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा था कि बी. अशोक को उनके वर्तमान पद पर बने रहना चाहिए। इसके बावजूद, राज्य सरकार ने 11 सितंबर को एक नया ट्रांसफर आदेश जारी कर दिया। इस पर बी. अशोक ने फिर से CAT का रुख किया, और न्यायाधिकरण ने सरकार के आदेश को अवैध करार देते हुए इसे रोक दिया।


सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बढ़ता तनाव

यह मामला केवल एक ट्रांसफर विवाद नहीं है, बल्कि यह केरल सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बढ़ते तनाव और मतभेदों को भी दर्शाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बी. अशोक ने सरकार के कुछ फैसलों पर तकनीकी और कानूनी आपत्तियां जताई थीं, जो उनके ट्रांसफर का कारण बन सकती हैं।कुछ अधिकारियों का मानना है कि यह ट्रांसफर आदेश सरकार की ओर से एक “दंडात्मक कार्रवाई” हो सकती है। वहीं, सरकार का तर्क है कि यह एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है।


CAT का आदेश और इसके प्रभाव

CAT ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य सरकार ने उनके पहले के आदेश का उल्लंघन किया है। न्यायाधिकरण ने यह भी कहा कि सरकार का यह कदम “प्रशासनिक नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन” है।CAT के इस फैसले का मतलब है कि बी. अशोक अपने वर्तमान पद पर बने रहेंगे और सरकार को उनके ट्रांसफर के लिए नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करनी होगी।


क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

इस मामले पर प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना “प्रशासनिक स्वतंत्रता और सरकार के हस्तक्षेप” के बीच संतुलन की आवश्यकता को उजागर करती है।

  • प्रशासनिक स्वतंत्रता: अधिकारियों को अपने कार्यों में स्वतंत्रता मिलनी चाहिए, ताकि वे बिना किसी दबाव के अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें।
  • सरकार का हस्तक्षेप: सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके आदेश प्रशासनिक नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप हों।

क्या यह मामला केरल की नौकरशाही में गुटबाजी को दर्शाता है?

इस विवाद ने केरल की नौकरशाही में गुटबाजी और आंतरिक संघर्षों को भी उजागर किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ अधिकारियों का मानना है कि बी. अशोक का ट्रांसफर उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों और सरकार के फैसलों पर उनकी आपत्तियों का परिणाम है।यह मामला यह भी दिखाता है कि कैसे प्रशासनिक अधिकारियों और सरकार के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं।

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