Random Posts

स्मार्टफोन कैमरा को लेकर इन गलतफहमियों से आप भी बना लें दूरी



हम अपने फोन और गैजेट्स को लेकर कई तरह की गलतफहमियों से घिरे होते हैं। हम टेक्‍नोलॉजी को लेकर सुनी-सुनाई बातों पर ज्‍यादा भरोसा करते हैं। हम लोग बिना पड़ताल किए हैं उस गैजेट की ओर आ‍कर्षित हो जाते हैं, फिर चाहे हकीकत कुछ और ही क्‍यों न हो। सबसे ज्‍यादा हम लोग ये काम फोन के साथ करते हैं। किसी के कहने पर या उसे फोन की तारीफ सुनकर बिना कुछ जांचें ही हम उस फोन को लेने के बारे में सोच लेते हैं। ऐसे ही कई तरह के मिथ हैं जिनसे हम बेखबर हैं। आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही गलतफहमियों के बारे में...

ज्‍यादा मेगापिक्सल का अच्‍छा होगा कैमरा

इसके बारे में जानने से पहले हम ये पता कर लेते हैं कि आखिर पिक्सल क्या होता है? हम कोई भी तस्‍वीर अपने फोन से क्लिक करते हैं, ये एक फोटो कई छोटे-छोटे डॉट से मिलकर बनती है, इन्‍हीं को पिक्सल कहा जाता है। इन्‍हीं पिक्‍सल से मिलकर तस्‍वीर तैयार होती है।
हज़ारों-लाखों छोटे-छोटे डॉट से मिलकर ये पिक्‍सल बनते हैं, जो हमें फोटो में नज़र नहीं आते। हमारा कैमरा लेंस, लाइट सेंसर, इमेज प्रोसेसिंग हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर से मिलकर बनता है। जैसे कि आईफोन 6 का 8 मेगापिक्सल कैमरा है और बाज़ार में मौज़ूद कई 13 मेगापिक्सल कैमरे वाले फोन को कड़ी टक्‍कर देता है। फोन में अतिरिक्त मेगापिक्सल सिर्फ हमारी प्रिंट की गई तस्वीर में सहायक हो सकते हैं। आपको बता दें कि कोई भी फोन कैमरा, कभी भी डीएसएलआर की जगह नहीं ले सकता है।

ज्यादा कोर वाला प्रोसेसर

हम हमेशा से मल्‍टी प्रोसेसर को ज्‍यादा तवज्‍जो देते हैं। क्‍योंकि मल्टी कोर प्रोसेसर हमारे फोन के कामों को एक-दूसरे में बांट देते हैं, जिससे कोई भी टास्क आसानी से हो जाता है। शुरुआती दौर में सिंगल कोर वाले स्‍मार्टफोन आते थे। उसके बाद 2 कोर वाले फोन की शुरुआत हुई।
 

ऐप और प्रोसेसर कोर

डुअल कोर, ऑक्टा कोर, क्वाड कोर किसी भी सीपीयू में प्रोसेसर की संख्या को बयां करते हैं। डुअल मतलब 2, ऑक्टा का मतलब है 8 और क्वाड का मतलब है 4। क्‍या आप जानते हैं कि क्वाड कोर प्रोसेसर सिंगल और डुअल कोर प्रोसेसर से उसी दशा में तेज़ हो सकता है, जब उसे दिया गया टास्‍क उसकी क्षमताओं से मेल खाता हो। कुछ ऐप खास तौर से सिंगल या डुअल कोर प्रोसेसर पर चलने के लिए ही बनी होती हैं।

चुपचाप से ब्राउज़ करने के लिए इनकॉग्निटो का यूज

यह एक गलतफहमी है कि इनकॉग्निटो विंडो सबसे सुरक्षित विकल्प है। दरअसल, हर ब्राउज़र में एक प्राइवेट विंडो का विकल्प रहता है। जाहिर सी बात है हम जो कि साइट को ओपन करते हैं हमारा सर्च इंजन का सारा ब्यौरा इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर और साइट को पता रहता है। इसलिए यह एक मिथ कि हम इनकॉग्निटो के इस्‍तेमाल से इस सर्च हिस्‍ट्री को छुपा सकते हैं। गूगल क्रोम पर इनकॉग्निटो को सीधे ओपन करने के लिए CTRL + SHIFT + N दबाकर खोल सकते हैं।

ऐप्पल में नहीं आता वायरस

आपने कई लोगों से सुना होगा कि ऐप्पल डिवाइस में वायरस कभी आ ही नहीं सकता। लेकिन आपकी इस गलतफहमी को दूर करते हुए हम आपको बता दें कि दुनिया में ऐसा शायद ही कोई सिस्टम है, जिसमें वायरस का नहीं आ सकता। हालांकि हम ये कह सकते हैं कि ऐप्पल के मैक कंप्यूटर का बाकी विंडोज़ पीसी के मुकाबले ट्रैक रिकॉर्ड काफी अच्छा है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ