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जीवन का ज्ञान: मोह-माया से निकलकर ही हम भगवान की भक्ति में लीन हो सकते हैं

गुरु रामकृष्ण परमहंस स्वामी विवेकानंद के गुरु थे और स्वामी विवेकानंद जी ने जीवन कैसे जीया जाता है, इस बात का ज्ञान गुरु रामकृष्ण परमहंस से ही लिया था। गुरु रामकृष्ण परमहंस द्वारा दिया गया ज्ञान स्वामी विवेकानंद ने इस दुनिया में फैलाया था और इस दुनिया को धर्म का असली मतलब बताया था। आज हम आपको गुरु रामकृष्ण परमहंस के जीवन से जुड़ा एक ऐसा ही प्रंसग बताने जा रहे हैं, जिसके माध्यम से गुरु रामकृष्ण परमहंस ने लोगों को ये बात समझाने की कोशिश की है कि आखिर कैसे हम लोग भगवान की भक्ति सच्चे मन से कर सकते हैं और इस संसार की मोह माया से कैसे बचा जा सकता है।
कहते हैं कि एक दिन जब गुरु रामकृष्ण परमहंस ध्यान कर रहे थे तभी उनके पास एक शिष्य आया। इस शिष्य ने गुरु रामकृष्ण परमहंस से एक सवाल करते हुए पूछा कि गुरू जी इंसान के मन में सांसारिक चीजें हर वक्त चलती रहती है और हर कोई अपनी इच्छाओं को ही पूरा करने में लगा हुआ है। ऐसे इंसान भगवान की भक्ति करना चाहें तो वो कैसे करें? संसार की इस मोह माया से किस तरह से बचा जा सकता है?
अपने शिष्य का ये सवाल सुनकर गुरु रामकृष्ण परमहंस ने हंसते हुए कहा, इस संसार में जो भी सुख हैं वो सब मोह माया है। हम मोह माया में आकर भगवान की भक्ति को भूल जाते हैं और संसार में मौजूद सुख पाने में लग जाते हैं। जिसकी वजह से हम लोगों का ध्यान भगवान की पूजा में नहीं लग पाता है।
अगर हम इस मोह माया से निकल जाएं तो हम सच्चे मन से भगवान की पूजा कर सकते हैं। अगर में सरल शब्दों में तुमें समझाओं तो, कोई बच्चा जब अपने खिलौनों के साथ व्यस्त होता है तो वो बच्चा अपनी मां को याद नहीं करता है और घंटों तक खिलौनों से खिलने में लगा रहता है। वहीं जब खिलौने से बच्चे का मन भर जाता है तो वो अपनी मां को याद करता है और मां के पास चले जाता है।

इसी तरह से ही जब तब हम मोह माया और संसार के सुखों में फंसे रहते हैं। तब तक हम भगवान का ध्यान सही से नहीं कर पाते हैं। जो लोग सच्चे मन से भगवान को पाना चाहते हैं और भगवान की भक्ति में डूबे रहना चाहते हैं उन लोगों को इस दुनिया की मोह माया से दूरी बनानी पड़ती है। जब आप अपने आपको इस दुनिया की मोह माया से अलग कर देते हैं तो आप भगवान में लीन हो जाते हैं।
गुरु रामकृष्ण परमहंस की ये बात सुनकर शिष्य को समझ आ गया कि अगर कोई इंसान भगवान को पाना चाहता है तो उसे दुनिया के सुख और मोह माया से दूर रहना चाहिए। इस संसार में अधिकतर लोग मोह-माया में फंसे हुए हैं और ऐसे लोग भगवान की और ध्यान नहीं दे पाते हैं। वहीं जो लोग मोह-माया से दूर हैं वो भगवान की भक्ति में सदा लीन रहते हैं।

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