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कथा: इंसान की पहचान उसके पद से नहीं बल्कि उसकी महानता से होती है

एक लोक कथा के अनुसार एक राजा अपनी प्रजा का खूब ध्यान रखता था और सदा प्रजा के हित में ही फैसले लिया करता था। एक दिन इस राजा ने सोचा कि वो क्यों ना एक आम आदमी बनकर अपने राज्य में घूमे तक उसे राज्य की प्रजा के हाल के बारे में पता चल सके। ये सोचकर राजा ने एक आम आदमी का वेश ले लिया और अपने राज्य के लोगों के बीच में चले गया।
राजा वेश बदलकर अपने नगर में घूमने लगा और प्रजा के लोगों से मिलकर उनसे उनकी समस्या पूछने लगा। राज्य में घूमते हुए राजा एक खेत में पहुंच गया। जहां पर एक मजदूर अकेले ही एक बड़ा सा पत्थर हटाने में लगा हुआ था और इस मजदूर के साथ एक जमीनदार काफी बुरा बर्ताव कर रहा था।
मजदूर को इतना भारी पत्थर उठाता देख राजा जमीनदार के पास जाता है और जमीनदार से मजदूर की मदद करने को कहते हैं। जमीनदार राजा को आम व्यक्ति समझकर राजा की बात को अनसुना कर देता है। जिसके बाद राजा खुद मजदूर के पास जाकर मजदूर की सहायता पत्थर हटाने में करता है। पत्थर हटाने के बाद मजदूर राजा का शुक्रिया अदा करता है। वहीं राजा मजदूर से कहता है कि अगर भविष्य में उसे कोई काम की जरूर पड़े तो वो राज महल आ जाए। राज महल में खूब बड़ा बाग है जहां पर वो काम कर सकता है।

ये बात सुनकर जमीनदार को शक हो जाता है कि ये व्यक्ति कोई आम इंसान नहीं है। जमीनदार गौर से व्यक्ति को देखता है और कुछ दी देर में पहचान लेता है कि ये आम व्यक्ति कोई है बल्कि इस राज्य का राजा है। राजा को पहचाने के बाद जमीनदार राजा से माफी मांगता है। राजा जमीनदार को माफ कर देता है और उसे समझाते हुए कहते हैं कि दूसरों की मदद करने से इंसान छोटा नहीं हो जाता है। इसलिए आगे भविष्य में वो हर उस व्यक्ति की मदद करें, जिसे सहायता की जरूरत हो। राजा की ये बात सुन जमीनदार को अपनी गलती का अहसास हो जाता है और वो समझ जाता है कि जब एक राजा होकर वो प्रजा की जनता की मदद कर सकते हैं। तो मैं तो एक मामूली सा जमीनदार हूं। जमीनदार राजा से वादा करता है कि वो आगे हर  व्यक्ति की मदद करेगा और अपने पद का घमंड नहीं करेगा।

इस कथा की सीख

इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है कि हमें कभी भी अपने पद का घमंड नहीं करना चाहिए और मन में लोगों की मदद करने की भावना रखनी चाहिए। आप चाहें कितने भी बड़े औदे पर क्यों ना हो आप अपने से छोटे लोगों की सहायता जरूर करें। क्योंकि इंसान की पहचान उसके पद से नहीं बल्कि उसकी महानता से होती है। इसलिए आप भी अपने मन में लोगों की मदद करने की भावना जरूर रखें और जब भी किसी को आपकी मदद की जरूरत हो तो उसकी सहायता जरूर करें।

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