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बुरी आदतों को समय रहते ही छोड़ दें, क्योंकि आगे जाकर इन्हें छोड़ना नामुमकिन हो जाता है

एक गांव में एक सेठ रहा करता था। ये सेठ काफी धनवान था और इसके पास कई सारी संपत्ति थी। इस सेठ के परिवार में इसकी पत्नी और 17  साल का एक बेटा था। सेठ का बेटा बहुत ही बिगड़ा हुआ था और बुरी आदतों का शिकार था। अपने लड़के की बुरी आदतों से सेठ काफी दुखी रहा करता था और सेठ का मन अपने कामों में नहीं लगता था। सेठ को दुखी देख एक दिन सेठ के नौकर ने उनसे परेशानी की वजह पूछी। सेठ ने अपने नौकर को बताया कि उसका बेटा नशा करता है और कई बुरी आदतों से घिरा हुआ है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि कैसे वो अपने बेटे की इन आदतों को छुड़वाएं।
सेठ की बात सुनने के बाद नौकर ने सेठ को एक सलाह दी औ कहा कि वो एक संत को जानता है। उस संत के पास इस समस्या का हल जरूर होगा। अपने नौकर की बात को मानते हुए सेठ अगले दिन ही संत के पास चले जाता है। संत से मिलकर सेठ उन्हें बताता है कि कैसे उनका बेटा नशा करता है और बुरी आदतों से घिरा हुआ है। लाख कोशिशों के बाद भी उनका बेटा सुधर नहीं रहा है। सेठ का दुख देख संत ने सेठ से कहा कि वो अपने लड़के को उनके पास भेज दें।
संत की बात को मानते हुए सेठ ने अपने बेटे को अगले दिन ही संत के आश्रम में भेज दिया। संत ने सेठ के बेटे से कहा कि वो अपनी आदतों को छोड़े दे क्योंकि उसकी ये आदते उसका जीवन बर्बाद कर रही हैं। लड़के ने संत से कहा, मेरे को पता है कि जो मेरी आदतें हैं वो खराब हैं और वक्त आने पर मैं खुद ही इन आदतों को छुड़ दूंगा। ये बात सुनने के बाद संत ने सेठ के लड़के को बोला कि कल तुम मेरे साथ बाग में चलना मैं तुम्हें कुछ पेड़ पौधे दिखना चाहता हूं।

सेठ का लड़का अगले दिन संत के साथ बाग में चले जाता है। बाग में कई प्रकार के पेड़-पौधे लगे होते हैं। संत लड़के से कहता है कि वो बाग में लगा एक छोटा सा पौधा उखाड़ दे। लड़का तुरंत ही एक छोटे से पौधे को उखाड़ देता है। इसके बाद संत लड़के को बड़े पौधे को उखाड़ने का आदेश देते हैं। लड़का बेहद ही आसानी से उस पौधे को भी जड़ से निकाल देता है। अंत में संत एक बड़े पेड़ को जड़ से निकालने को कहते हैं। लड़का उस पौधे को निकालने की खूब कोशिश करता है। लेकिन पौधे की जड़े काफी मजबूत होती हैं। जिसकी वजह से वो पौधा नहीं निकल पाता है।
लड़का संत से कहता है इस पौधे की जड़े मजबूत हैं और इसे नहीं निकाला जा सकता है। संत ये सुनने के बाद कहता है, ये पौधा जड़ों से मजबूत हो गया है और इसे निकालना मुश्किल है। ठीक ऐसा ही हमारी बुरी आदते भी जब हमें अच्छे से पकड़ लेती हैं तो उन्हें छोड़ पाना कठिन होता है। तुम्हारी आयु अभी ज्यादा नहीं है और तुम्हारी बुरी आदतों की जड़ें कमजोर हैं। तुम अगर चाहों तो  इन आदतों को अभी उखाड़ कर फेंक सकते हैं। तुम ये आदतें अगर अभी नहीं  छोड़ोगे तो धीरे-धीरे इनकी जड़ें मजबूत हो जाएंगी। तब इन्हें उखाड़ पाना असंभव हो जाएगा। संत की बात लड़के को अच्छे से समझ आ गई और उसने अपनी बुरी आदतें त्याग दी।

कथा की सीख

बुरी आदत को समय रहते ही छोड़ देना चाहिए, वरना ये आगे जाकर और बढ़ जाती हैं और इन्हें छोड़ना नामुमकिन हो जाता है।

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