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सरकार को 1.47 लाख करोड़ चुकाने की डेडलाइन हुई खत्म



एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) का बकाया समय पर नहीं लौटाने को लेकर भारती एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया, रिलायंस कम्युनिकेशन, टाटा टेलीसर्विसेज और अन्य दूरसंचार कम्पनियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। उच्चतम न्यायालय की फटकार के बाद दूरसंचार विभाग ने कंपनियों को शुक्रवार रात 12 बजे से पहले AGR भुगतान करने का आदेश दिया था, जिसकी डेडलाइन अब खत्म हो चुकी है। हालांकि इस आदेश के बाद भारती एयरटेल ने बकाया चुकाने की पेशकश कर दी है लेकिन बाकी कंपनियों का अभी कुछ साफ नहीं हो पाया है। 14 साल से चले आ रहे AGR यानी एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम यानी डीओटी को सही ठहराते हुए पिछले साल 24 अक्टूबर को भारती एयरटेल और वोडाफोन समेत 15 टेलीकॉम कंपनियों को लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज के रूप में 1.47 लाख करोड़ रुपए की बकाया रकम 23 जनवरी तक अदा करने करने का आदेश दिया था। जिसके बाद भारती एयरटेल और वोडाफोन ने इस आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी। जिसे जनवरी में खारिज कर दिया।

दरअसल बकाया भुगतान करने की तय समय सीमा 23 जनवरी को खत्म हो गई। जिसके बाद डीओटी के एक अधिकारी ने पत्र जारी कर बकाया भुगतान नहीं करने वाली कंपनियों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश जारी कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इसी फैसले को लेकर शुक्रवार को विभाग की खिंचाई की। कोर्ट ने कहा कि क्या इस देश में कोई कानून नहीं बचा है। जब हम पहले ही टेलीकॉम कंपनियों को भुगतान का आदेश दे चुके हैं, तब कोई डेस्क ऑफिसर ऐसा आदेश कैसे जारी कर सकता है? कोई अधिकारी कोर्ट के आदेश के खिलाफ जुर्रत कर सकता है तो सुप्रीम कोर्ट को बंद कर देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद दूरसंचार विभाग ने कंपनियों को सर्किल के आधार पर बकाये के संबंध में नोटिस भेजना शुरू कर दिया। उत्तर प्रदेश (पश्चिम) दूरसंचार सर्किल ने शुक्रवार को सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को नोटिस जारी कर शुक्रवार को 11.59 तक बकाये का भुगतान करने को कहा। इसमें कहा गया कि आपको लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क के एवज में बकाया राशि का भुगतान 14.02.2020 को रात 11.59 से पहले करने निर्देश दिया जाता है।दरअसल, टेलीकॉम कंपनियों से टेलीकॉम डिपार्टमेंट एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) मांग रहा है। एजीआर, संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा टेलीकॉम कंपनियों से लिया जाने वाला यूजेज और लाइसेंसिग फीस है। इसके दो हिस्से होते हैं- स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज और लाइसेंसिंग फीस, जो क्रमश 3-5 फीसदी और 8 फीसदी होता है।

अभी दूरसंचार क्षेत्र में सरकारी कंपनियों बीएसएनएल और एमटीएनएल के अलावा निजी क्षेत्र की तीन कंपनियां भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और रिलायंस जियो हैं। लेकिन कोर्ट और सरकार के इस रूख के बाद आइडिया-वोडाफोन के लिए मार्केट में बने रहना मुश्किल हो रहा है। वोडा आइडिया के चेयरमैन आदित्य बिड़ला ने भी पहले कह दिया है कि अगर सरकार से मदद नहीं मिली तो कंपनी बंद हो जाएगी। वहीं बीएसएनएल और एमटीएनएल के भी हालात किसी से छुपे नहीं है। हालांकि बकाए को लेकर एयरटेल ने जानकारी दी है कि, कंपनी 20 फरवरी तक 10,000 करोड़ रुपये का भुगतान कर देगी और बाकी रकम का भुगतान सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई से पहले कर दिया जाएगा। ऐसे में भारतीय टेलिकॉम सेक्टर के मौजूदा हालात भविष्य में केवल दो ही टेलीकॉम कंपनियों मार्केट में बचे रहने की और इशारा करता है। भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में केवल दो टेलिकॉम कंपनियां होना सही साबित होगा या नहीं, इस पर सरकार को जरूर सोचने की जरूरत है। वोडाफोन आइडिया पर 28,309 करोड़ लाइसेंस फीस और 24,729 करोड़ का स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज बकाया है वहीं भारती एयरटेल पर 21,882 करोड़ की लाइसेंस फीस और 13,904 करोड़ का स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज बाकी है।टाटा टेलीसर्विसेज में लाइसेंस फीस का 9,987 करोड़ और स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज की 3,836 करोड़ रुपये की देनदारी है।रिलायंस जियो पर केवल 60 करोड़ रुपये का बकाया था जिसे भी वो अदा कर चुकी है।

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