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पूर्व केन्द्रीय मंत्री पी. चिदंबरम को 105 दिन बाद मिली जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने मनी लांड्रिंग के ईडी वाले मामले में पूर्व केन्द्रीय मंत्री पी चिदंबरम को जमानत दे दी है। 105 दिन जेल में रहने के बाद चिदंबरम अब खुली हवा की सांस ले सकते हैं। जस्टिस आर भानुमति की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये फैसला सुनाया। कोर्ट ने दो लाख रुपये के मुचलके पर उन्हें जमानत दी। हालांकि उन्हें देश छोड़ने के लिए अदालत से अनुमति लेनी होगी। चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया डील मामले में मीडिया में कुछ भी बयान देने से मना किया गया है। पिछले 28 नवम्बर को कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने चिदंबरम को निर्देश दिया कि वे जांच में सहयोग करें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके फैसले का दूसरे अभियुक्तों के मामले पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

कोर्ट ने कहा कि वो सीलबंद लिफाफे को नहीं देखना चाहती है। चूंकि हाईकोर्ट ने इन दस्तावेजों को देख लिया था। इसलिए हम उसे नहीं देखना चाहते हैं। चिदंबरम ने हाईकोर्ट के आदेश को ही चुनौती दी है। सीबीआई की ओर से दायर केस में चिदंबरम को पहले ही जमानत मिल चुकी है। फैसला सुनाए जाने के वक्त वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, सलमान खुर्शीद के अलावा सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कोर्ट में मौजूद थे।

सुनवाई के दौरान ईडी ने चिदंबरम की जमानत याचिका का विरोध किया था। ईडी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि चिदंबरम की तरफ से कहा गया है कि मैं रंगा-बिल्ला नहीं हूं, तो मुझे क्यों जेल में रखा जा रहा है। इसका जवाब ये है कि इस अपराध की गंभीरता समाज पर प्रभाव डालती है। तुषार मेहता ने कहा था कि अगर बेल मिली तो आम आदमी का सिस्टम से भरोसा खत्म हो जाएगा। आरोपित वित्त मंत्री के पद पर थे। मेहता ने कहा कि एक गवाह ने उनके साथ आमने-सामने बैठने से मना कर दिया। उस गवाह ने कहा कि वो बहुत प्रभावशाली हैं। मेहता ने कहा था कि क्या हम तभी करवाई करेंगे जब अपराध करने वाला रंगा-बिल्ला होगा? 

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