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ये क्या! एक घटना ने बदल दी कबीले की सोच, सभी ने छोड़ी शिकारी

ये क्या!  एक घटना ने बदल दी कबीले की सोच, सभी ने छोड़ी शिकारी

नगालैंड के अंगामी कबीले के लिए शिकार करना स्वभाव और बंदूक रखना परंपरा रही है। लेकिन खोनोमा के एक युवा शिकारी माइकल मेगोविसा सोफी ने उनके स्वभाव को बदल दिया। 


माइकल ने केवल अपनी बंदूक छोड़ दी, बल्कि उन सभी कबीले की बंदूकें भी रखवा दी, जो जंगल में किसी भी जानवर को देखते ही गोली मार देते थे। ये लोग परिंदों को भी नहीं छोड़ते थे। गांव वालों के साथ मिलकर सोफी ने पूरे इलाके को जंगली पशु-पक्षियों से गुलजार कर दिया है। इलाके को सेंक्चुरी बना डाला।


कबीले के लीडर और सबसे अच्छे शिकारी सोफी हर दिन किसी न किसी जंगली जानवर का शिकार न करते थे। लेकिन एक घटना ने सोफी की पूरी जिंदगी बदल दी।


एक बार शिकार पर गए सोफी के सामने पेड़ पर हलचल हुई तो उसने ट्रिगर दबा दिया। जमीन पर मादा बंदर गिरी। कुछ देर बाद पास पहुंचे तो देखा बच्चा मां से लिपटा हुआ था। खून से लथपथ मादा बंदर तड़प रही थी। उसकी मौत हो गई। बच्चा रो रहा था। इस घटना ने सोफी को झकझोर दिया।


इसके बाद उसने घर जाने के बाद तय कर लिया कि अब दोबारा शिकार नहीं करेंगे और बंदूक को हमेशा के लिए रख दिया।


इसके बाद सोफी गांव वालों को जागरुक करने के काम शुरू कर दिया। अपने कबीले के लोगों को बंदूक छोड़ने के लिए प्रेरित किया। उनका गांव खोनोमा, नगालैंड की राजधानी कोहिमा से करीब 20 किमी दूर है।


उन्हें समझाना शुरू किया कि जंगली जानवरों और पक्षियों को मारना गलत है। इसी दौरान पड़ोस के गांव के तिसिली साखरी शिकार और जंगलों की कटाई के खिलाफ अभियान चला रहे थे। साखरी गांवों में लोगों को बता रहे थे कि अगर शिकार और पेड़ों की कटाई ऐसे ही जारी रही तो भविष्य के लिए कुछ नहीं बचेगा।


इसके बाद साखरी की मुलाकात सोफी से हुई। दोनों ने मिलकर काम करने की योजना बनाई। सोफी की कहानी से अंगामी कबीले युवाओं पर काफी असर पड़ा और नई पीढ़ी ने हथियार उठाना बंद कर दिया।


साथ ही कबीले के बुजुर्ग भी इस काम में उनके साथ में आए। गांव में शिकार को पूरी तरह रोक दिया गया। कबीले ने मिलकर काउंसिल बनाई। हर घर से एक ग्रामीण को इसका मेंबर बनाया। 20 स्क्वेयर किमी के इलाके को सेंक्चुरी बना दिया। इसके बाद सरकार ने भी इसे कानूनी मंजूरी दे दी।


माइकल सोफी के मुताबिक आज फिर से पूरा इलाका फिर हरा-भरा हो गया है। जंगली जानवर और पक्षी आबाद हो गए हैं। हमारी कोशिश को प्रशासन का भी साथ मिला है। इसमें तकरीबन 14 साल लग गए।

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