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मरने के बाद भी हिंदू ने बचाई मुस्लिम की जान, 6 लोगों को जिंदगी दे गया ये जवान

मरने के बाद भी हिंदू ने बचाई मुस्लिम की जान, 6 लोगों को जिंदगी दे गया ये जवान

यह कहानी है आईटीबीपी के जवान रोशन कुमार की,जिसने मरने के बाद 6 लोगों को जिंदगी दी। 22 साल के रोशन कुमार उत्तराखण्ड के रहने वाले थे। उनकी पहली पोस्टिंग आईटीबीपी में हुई थी। पिछले सप्ताह एक सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई। द्वारका इलाके में तेज गति से आ रही बाइक ने उनको टक्कर मार दी। रोशन कुमार अपने रिश्तेदारों से मिलने जा रहे थे। हादसे में रोशन कुमार के सिर में गंभीर चोटें आई। रोशन कुमार को अस्पताल में भर्ती कराया गया,जहां उनकी मौत हो घई। मौत के बाद परिवार ने रोशन कुमार के अंग दान कर दिए जिससे 6 लोगों को जिंदगी मिली।

रोशन कुमार आर्मी बैकग्राउंड से थे। उनका लालन पालन चाचा ने किया था। चाचा ने समाचार पत्र मेल टुडे को बताया कि जब रोशन एक साल का था तब उसके माता पिता का निधन हो गया। मैंने उसकी देखभाल की। स्कूल के दिनों से ही उसका सपना था कि वह सैनिक बनकर देश की सेवा करना चाहता है। इसके लिए रोशन ने कड़ी मेहनत की। उसका सपना हकीकत में तब्दील हो गया। भले ही रोशन अब देश की सुरक्षा के लिए बॉर्डर पर नहीं है लेकिन मुझे यह कहते हुए गर्व है कि उसने 6 लोगों को जिंदगी देकर देश की सेवा की है।

सफदरजंग अस्पताल के अस्पताल अधीक्षक डॉ एके राय ने बताया कि पिछले सप्ताह देर रात हमें द्वारका स्थित अस्पताल से कॉल आया। उन्होंने कहा कि वे गंभीर रूप से घायल मरीज को रेफर कर रहे हैं। हमने अपनी एक्सपर्ट टीम को एक्टिवेट किया क्योंकि मरीज के जिंदा बचने के चांसेज बहुत कम थे। दुख की घड़ी में भी परिवार के सदस्य मृतक के अंग दान के लिए राजी हो गए क्योंकि उनका बेटा देश सेवा की इच्छा को पूरा करना चाहता था।

सफदरजंग अस्पताल में रेनल ट्रांसप्लांट विभाग के प्रमुख डॉ अनूपर कुमार ने बताया कि जब रोशन को ब्रेन डेड घोषित किया गया तो परिवार उनके अंग दान करने के लिए राजी हो गया। नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन की एक्सपर्ट टीम और सफदरजंग अस्पताल ने ऑर्गन रिट्रीवल की प्रक्रिया शुरू कर दी। सभी सक्रिय अंगों जैसे आंखें,दिल,लीवर,किडनी और इन्टेस्टिन को प्रोक्योर किया गया। इन अंगों के कारण 6 मरीजों को नई जिंदगी मिली।

दो मरीजों को किडनी मिली। एक को लवर। इन्टेस्टिन को मेदांता अस्पताल भेजा गया है। रोशन का एक्ट देश के लिए भाईचारे और सौहार्द का संदेश है। डॉ कुमार ने कहा,रोशन रत्न है। उसकी एक किडनी सफदरजंग अस्पताल में उस मरीज को प्रत्यारोपित की गई जो दो साल से डायलसिस पर था और उसे कोई डोनर नहीं मिल रहा था। मेल टुडे से बातचीत में 47 साल के परवेज आलम ने कहा,मैं खुशकिस्मत हूं कि हिंदू मरीज ने मुझे किडनी दी,जो ब्रेन डेड था। रोशन ने हिंदू मुस्लिम भाई भाई को साबित किया है।

मैं पिछले दो साल से किडनी की तलाश में था। जब मैं डायलसिस के आखिरी स्टेज पर था तब चमत्कार हुआ। ईश्वर रोशन की आत्मा को शांति प्रदान हो। सफदरजंग अस्पताल ने रोशन के परिवार का शुक्रिया अदा दिया। डॉ संगीता शेरावत ने कहा, अगर कोई व्यक्ति अपने सपने पूरे करने के प्रति डेडिकेट हो तो वह उन्हें तब भी पूरा कर सकता है जब वह जिंदा ना हो। सिर्फ डिटरमिनेशन की जरूरत होती है और इसे साबित किया है प्रेरणादायक युवा डिफेंस पर्सनल ने।

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