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काम के दौरान सेक्स के लिए एक घंटे का ब्रेक देगी सरकार, जानिए इसकी वजह

काम के दौरान सेक्स के लिए एक घंटे का ब्रेक देगी सरकार, जानिए इसकी वजह

स्वीडन सरकार अपने कर्मचारियों के हित के बारे में सोचने के लिए जानी जाती है। कर्मचारियों को काम के दौरान आराम मिल सके इसके लिए सरकार हमेशा कुछ न कुछ नया करते रहती है। अब स्वीडन सरकार एक अनोखा प्रस्ताव लेकर आई है। 

प्रस्ताव ये है कि अब कर्मचारियों को काम के बीच में एक घंटे का ब्रेक दिया जाएगा ताकि वे अपने पार्टनर के साथ सेक्स कर सके। और तो और उस एक घंटे के दौरान उनके पैसे भी नहीं कटेंगे। ये प्रस्ताव लाया है ओवरटोर्निया शहर के स्थानीय काउंसलर पेर एरिक। एरिक का कहना है कि आधुनिक युग में व्यस्तता के कारण कपल एक दूसरे को समय नहीं दे पाते हैं जिसके कारण उनके रिश्ते खराब हो जाते हैं। एरिक को उम्मीद है कि अगर ये प्रस्ताव पास हो जाएगा तो कपल्स के रिश्ते बेहतर होंगे। इससे पहले 2015 में स्वीडन के ही गोथेनबर्ग में नर्सों के लिए काम के घंटे 8 की बजाय 6 किए गए थे। 
ये प्लान एक दो साल तक चलने वाले पायलट स्कीम का हिस्सा है। स्वीडन सरकार कर्मचारियों से कम समय में अधिक काम कराने पर यकीन रखती है। इनका मानना है कि इससे कर्मचारी अच्छा काम करेंगे। साथ ही अपना निजी जीवन भी अच्छे से बिता सकेंगे। सरकारी दफ्तरों में भी 2 हिस्से बनाए गए थे। जहां एक ग्रुप 6 घंटे काम करेगा और दूसरा 8 घंटे। एक साल बाद रिजल्ट देखा जाएगा कि किस टीम ने अच्छा काम किया और छुट्टी कम ली। हालांकि 15 साल पहले इसकी शुरुआत कार की एक बड़ी कंपनी टोयोटा ने की थी। 
ऐसे नियम बनाने के बाद कर्मचारियों ने न सिर्फ बढ़ चढ़कर काम किया बल्कि कंपनी का मुनाफा भी बढ़ा। नेशनल स्लीप फाउंडेशन की एक रिसर्च के मुताबिक अमरीका में विवाहित या लिव इन में रहने वाले हर चार में से एक कपल ठीक से नहीं लेट पाता है। इस कारण उन्हें थकान होती है और वे अपने पार्टनर के साथ सेक्स नहीं कर पाते हैं। ज्यादा काम करने की वजह से कपल की धीरे धीरे सेक्स से रूचि खत्म हो जाती है। दूसरे देश हमेशा स्वीडन की वर्क पॉलिसी से अपने यहां की नीतियों की तुलना करते हैं। वहीं आर्थिक विश्लेषक इसकी एक बडी वजह बताते हैं यहां के लोगों का पढ़ा लिखा होना। स्वीडन के ज्यादातर काम करने वाले बहुत पढ़े लिखे होते हैं, जिसकी वजह से ये नई तकनीक को तेजी से समझते हैं। ये एक बेहद संवेदनशील मसला है जिस पर स्वीडन सरकार ने गंभीरता दिखाई है। 

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