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इस शख्स ने जल्दी जवाब पाने के लिए FB पर बनाई लड़की के नाम से ID, फिर जाने क्या हुआ

इस शख्स ने जल्दी जवाब पाने के लिए FB पर बनाई लड़की के नाम से ID, फिर जाने क्या हुआ

देश में प्रतिभा की कमी नहीं है। खास कर न्यू जेनरेशन के बच्चे काफी प्रतिभावान हैं। उन्हें जब भी कोई समस्या होती है वे सवाल पूछते हैं। अपना जवाब जानने के लिए नई तरकीब ढूंढते रहते हैं। आज ऐसे ही दो भाइयों के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं।


दिल्ली के पीरागढ़ी मेट्रो स्टेशन के नजदीक रहने वाले दो जुड़वा भाई युवराज और यशराज भारद्वाज 17 साल की उम्र में 22 रिसर्च पर काम कर रहे हैं और 7 रिसर्च का पेटेंट करवा चुके हैं। बता दें कि 6वीं क्लास से रिसर्च कर रहे दोनों भाई जेनिथ वाइपर्स (Zenith Vipers) के वे सह-संस्थापक हैं।


बता दें कि मन की जिज्ञासाओं का समाधान करने के लिए बड़े वैज्ञानिकों और प्रोफेसर्स से सवाल पूछते थे, देर से जवाब मिलने पर उन्होंने लड़की की फर्जी आईडी से जवाब ढूंढने का रास्ता खोज लिया, जो कारगर भी रहा।
युवराज और यशराज भारद्वाज डिस्कवरी समेत अन्य साइंस चैनल देखकर मन में आने वाली जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए वे क्लास में सवाल पूछने लगे, लेकिन उन्हें बाहर खड़ा कर दिया जाता था।

रिसर्च के शुरुआती वक्त में जब उन्हें कभी फुर्सत मिलती थी तो वे सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक, ट्विटर और लिंकेडिन पर बड़े साइंटिस्ट या प्रोफेसरों से चैटिंग करते थे।


जब उन्होंने भी सवालों के जवाब देना बंद कर दिया तो उन्होंने नई तरकीब अपनाते हुए लड़की के नाम से फेसबुक पर फर्जी प्रोफाइल बनाई और चैटिंग करना शुरू कर दी।


इसके बाद युवराज और यशराज को चैटिंग के दौरान सवालों के जवाब मिलने लगे। जबकि पहले उन्हें 6-6 महीने में जवाब मिलते थे। यही नहीं, सोशल मीडिया के अलावा वे ई-मेल के माध्यम से भी स्टीफन हॉकिंग्स, लॉरेंट्स क्रूट्ज, रॉबर्ट जूबरिन, रोसेली रॉब्स जैसे साइंटिस्टों से संपर्क में रहते हैं।
12वीं में पढ़ने वाले इन बच्चों को टैलेंट के चलते कई इंस्टीट्यूट में बतौर गेस्ट बुलाए और सम्मानित किए जा चुके हैं। दोनों 7 साल की उम्र से साइंस के कई प्रोजेक्ट को लेकर रिसर्च कर रहे हैं। कद्दू के बीजों और बाजरे से पानी को साफ करना समेत कई सफल रिसर्च कर चुके हैं।


महज 6 साल की उम्र से रिसर्च स्टार्ट करने वाले जुड़वा भाई यशराज और युवराज ने ब्रेन से कंट्रोल होने वाला ड्रोन बना दिया है। दोनों युवा वैज्ञानिकों ने रिसर्च के लिए लगभग अपना जीवन ही समर्पित कर दिया है। वे महज 3-4 घंटे की नींद लेकर रिसर्च में सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं।


दरअसल, युवराज और यशराज भारद्वाज 7वीं क्लास में पढ़ने के दौरान एक साइंस से जुड़े प्रोग्राम में गए थे। इस प्रोग्राम में चीफ गेस्ट के तौर पर आए शख्स ने बताया कि, '1930 के बाद किसी भारतीय को साइंस में नोबल पुरस्कार नहीं मिला। हमारे देश में प्रति दस लाख लोगों पर 156 रिसर्चर्स हैं, जबकि यूएस में यही इतने ही लोगों पर 4700 रिसर्चर्स हैं।' तभी से दोनों युवा वैज्ञानिक देश को सम्मान दिलाने के लिए जुट गए हैं।

वर्ष 1800 में किसी रिसर्चर ने केले के छिलके से पानी को स्वच्छ बनाने का प्रयोग किया था, लेकिन महंगा होने के कारण इसका इस्तेमाल रोक दिया गया। कुछ इसी तर्ज पर युवराज और यशराज ने सीताफल से पानी साफ करने की कोशिश की, जो सफल हुई। इसके पानी की शुद्धता 62-65 फीसद तक बढ़ गई।


युवा वैज्ञनिकों ने बताया कि देश में फल काफी महंगे होने की वजह से बाजरा से पानी साफ करने पर रिसर्च की। उन्होंने कद्दू के बीजों से पानी को साफ करके दिखाया, लेकिन वो आइडिया लीक हो गया था और दूसरे लोग उस पर अपना दावा करने लगे। इसी वजह से अब वे दोनों वैज्ञानिक अपनी हर रिसर्च का पेटेंट करा लेते हैं।


नदियों का पानी साफ करने के लिए यशराज और युवराज ने बाजरा वाटर प्यूरीफायर पर रिसर्च की है। बाजरा में कार्बोसिक एसिड होता है, जो प्रदूषित पानी को शुद्ध कर देता है। इसके लिए उन्हें गंगा रिवर कन्जर्वेशन और मिनिस्ट्री ऑफ वाटर रिर्सोस ने अप्रूवल दिया है।


इस पोर्टेबल डिवाइज की मदद से इंसान के शरीर की सभी जांचें (ब्लड प्रेशर, शुगर, ईसीजी, टेंपरेचर) एक साथ की जा सकती हैं। 6000 रुपए कीमत की इस मशीन के जरिए मरीज हार्ट अटैक की स्थिति में डॉक्टर को अपनी ईसीजी रिपोर्ट भेज पाएगा।


युवा वैज्ञानिक यशराज और युवराज ने सबसे खास दिमाग से नियंत्रित होने वाला ड्रोन बनाया है। आप जो सोचेंगे वो संदेश मशीन में चला जाएगा और वो मशीन आपका लाइट ऑन करना, पंखा-कूलर ऑन करने जैसे काम कर देगी। इसके जरिए महज सोचने भर से दिव्यांग या कोई गंभीर मरीज के काम हो जाएंगे। जैसे दिमाग ने सोचा कि लाइट और पंखा बंद और चालू हो जाएंगे। इसकी कीमत करीब 10-15 हजार रुपए तक रहेगी।


उन्होंने एक मोबाइल ऐप भी बनाया है, जिससे आप किसी जगह पहुंचने के पहले ही पार्किंग की जगह बुक करा सकते हैं। इसके अलावा एक बम डिफ्यूज डिवाइज भी बनाई है, जो इंसान के सोच के मुताबिक चलेगी।


यशराज और युवराज भारद्वाज की रिसर्च को देखते हुए साउथ अफ्रीका की एक संस्था ने उनको 1 लाख डॉलर की फेलोशिप दी। इन पैसों से दोनों ने जेनिथ वाइपर्स नाम की कंपनी खड़ी कर ली। अब वे इसके सीईओ और फाउंडर हैं। इसके माध्यम से वे युवाओं को रिसर्च और पेटेंट में मदद करते हैं।

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