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मणिपुर में है मदर्स मार्केट, यहां सिर्फ महिलाएं चलाती हैं दुकान

मणिपुर में है मदर्स मार्केट, यहां सिर्फ महिलाएं चलाती हैं दुकान

मणिपुर के इमा कैथेल का बाजार पूरी तरह से महिला प्रधान बाजार है। मणिपुरी भाषा में इमा का मतलब होता है मां और कैथेल का मतलब होता है बाजार। यहां महिलाएं ही दुकान चलाती हैं। 

बता दें कि 16वीं सदी में स्थापित इस बाजार की नींव साल 1533 में रखी गई थी। तब से यहां केवल महिलाएं ही दुकानदार होती हैं यानी इसका पूरा संचालन महिलाओं के हाथ में होता है।

लगभग 4000 दुकानों वाली इस मार्केट में एक भी पुरुष काम नही करता है। पूरे एशिया में महिलाओं का इससे बड़ा मार्केट कोई दूसरा नही है। इस मार्केट को मदर्स मार्केट के नाम से भी जाना जाता है।
मैदानी इलाकों में रहने वाली महिलाओं के साथ-साथ दूरदराज पहाड़ी इलाकों में रहने वाली आदिवासी महिलाएं भी ताजी सब्जी, फल, मछली आदि बेचने बड़ी संख्या में यहां आती हैं। इस बाजार में पटरी पर सामान बेचने वाली अधिकांश महिलाएं बिशनुपुर, उखरुल, सेनापति, चंदेल, तामेंगलोंग, चुराचांदपुर जैसे जिलों से आती हैं।

इनमें से कुछ महिलाएं तो पटरी पर बैठकर अपना सामान खुद बेचती हैं, वहीं कुछ महिलाएं अपना सारा सामान दुकान वाली महिलाओं को बेचकर अपने घर चली जाती हैं।

इस बाजार के होने के पीछे भी बड़ी दिलचस्प कहानी है, दरअसल 16वीं शताब्दी में जब यहां राजा का शासन हुआ करता था तो राजा के द्वारा अधिकांश पुरुषों को या तो युद्ध के लिए या फिर चावल की खेती करने के लिए भेज दिया जाता था। घरों में अकेली औरतें बचती थीं, वे औरतें खेती का काम भी करती थीं और साथ ही अपनी दुकानों पर भी बैठती थीं। धीरे-धीरे औरतों की यह दिनचर्या, उनकी परंपरा में शामिल हो गई।
आज इस बाजार में काम करने वाली लगभग 4000 महिलाएं अपने परिवार की अर्थव्यवस्था चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हैं।

यहां की महिलाओं की आत्मनिर्भरता प्रेरणा देती है उन महिलाओं को, जो अपने जीवन में कुछ करना चाहती हैं, आगे बढ़ना चाहती हैं।

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