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अर्थव्‍यवस्‍था की रफ्तार हुई और सुस्‍त, दूसरी तिमाही में जीडीपी दर 4.5 फीसदी

अर्थव्‍यवस्‍था में जारी सुस्‍ती को रफ्तार देने की तमाम कोशिशों के बावजूद सरकार को आर्थिक र्मोचे पर तगड़ा झटका लगा है। देश की आर्थिक ​विकास दर यानी सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी) मौजूदा वित्त वर्ष 2019-20 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितम्बर) में घटकर 4.5 फीसदी पर पहुंच गई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के द्वारा शुक्रवार को जारी जीडीपी आंकड़ों के मुताबिक यह पिछले 26 तिमाही में सबसे कम है।

उधर, जीडीपी के आंकड़ों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए वित्‍त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि देश को पांच ट्रिलियन अर्थव्‍यवस्‍था बनाने का जो मौजूदा लक्ष्‍य है वो कम से कम एक साल पिछड़ रहा है।

चालू वित्‍त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में जीडीपी दर घटकर पांच फीसदी पर आ गई थी। वहीं, गत वित्‍त वर्ष की समान तिमाही में जीडीपी दर सात फीसदी दर्ज की गई थी। जीडीपी आंकड़े जारी होने से एक दिन पूर्व वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में आर्थिक हालात पर चर्चा के दौरान कहा था कि विकास दर में गिरावट है लेकिन मंदी नहीं है।

जीडीपी आंकड़ा आने से पहले जारी आठ कोर सेक्‍टर की जारी आंकड़ों के मुताबिक अक्‍टूबर महीने में भी 5.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, जीडीपी को लेकर जारी अनुमान के अनुसार इसे 6 फीसदी रहने की संभावना व्‍यक्‍त की गई थी। वहीं, दुनिया की कई सारी रेटिंग एजेंसियों ने मौजूदा वित्‍त वर्ष में देश की जीडीपी दर में गिरावट का अनुमान व्‍यक्‍त किया था।

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