Random Posts

12 साल से मुर्दे के साथ रह रही है यह फैमिली, मानती हैं उनको जिंदा

12 साल से मुर्दे के साथ रह रही है यह फैमिली, मानती हैं उनको जिंदा

नई दिल्ली। इंडोनेशिया के दक्षिणी सुलावेसी द्वीप पर रहने वाली तोराजा कम्युनिटी में एक अजीबो-गरीब रिवाज सामने आया है। दरअसल इस समुदाय के लोग मृत शरीर को जीवित की तरह ट्रीट करते हैं। इतना ही नहीं रोजाना उसके लिए खाना-पानी, कपड़े, साफ-सफाई, यहां तक कि सिगरेट वगैरह का इंतजाम भी किया जाता है। आपसी बातचीत में भी उसके लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग करते हों, मानो वे जिंदा हों और बस बीमार हों। जी हां, एक ऐसा ही परिवार है जो कि पिछले 12 बरस से उस मृतक के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा है।


बता दें कि इन लोगों में अंतिम संस्कार बहुत खर्चीला होती है। कई पशुओं की बलि देकर पूरे समाज को खिलाना-पिलाना होता है। इस तरह अंतिम संस्कार कई दिनों तक चलता है।कहते हैं कि इसमें इंडोनिशया में सालाना मिलने वाली एवरेज सैलरी से भी कई गुना ज्यादा खर्च हो जाता है। जब तक अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं जुट जाते, परिवार मृत सदस्य को अपने साथ ही रखता है। इस दौरान मुर्दे के भीतर इंजेक्शन से फार्मेलिन रसायन डाला जाता है, ताकि वह सड़े नहीं। उसे ताबूत में लिटाकर घर के भीतर ही रखा जाता है। उसके लिए बाकायदा खाना, नाश्ता, पानी आदि का इंतजाम होता है। रोजे उसके कपड़े बदले जाते हैं, रात को ढीले कपड़े पहनाए जाते हैं।


इस कम्युनिटी में मृतक को दफना दिए जाने के बाद साल में एक बार कब्र से निकालकर बाकायदा नहलाया-धुलाया जाता है और बाल संवारकर नए कपड़े पहनाए जाते हैं। स्थानीय भाषा में इस रिवाज को माएने कहा जाता है, जिसका मतलब होता है, शवों को साफ करने का समारोह। इस दौरान बुजुर्गों ही नहीं, बच्चों के शवों को भी बाहर निकाला जाता है। शवों को कब्रों से निकालकर वहां ले जाया जाता है, जहां व्यक्ति की मौत हुई थी, फिर उसे गांव लाया जाता है। गांव तक लाने के दौरान सीधी रेखा में चला जाता है। इस दौरान मुडऩा या घूमना वर्जित होता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ