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यहां एक नहीं कई लड़कों के साथ शादी करती हैं लड़कियां

यहां एक नहीं कई लड़कों के साथ शादी करती हैं लड़कियां

विश्व भर में अनेकों जनजाति पाई जाती है और लगभग प्रत्येक जनजाति में रहन-सहन, परम्पराएं और रीती रिवाज़ अलग-अलग होते हैं। कुछ जनजाति की परम्पराएं तो बेहद ही हैरान कर देने वाली होती है। ऐसी ही है मेघालय में पाई जाने वाली जनजाति है 'खासी'। 

यह जनजाति मुख्यतः भारत के मेघालय में निवास करती हैं। यह जनजाति उन गिनी चुनी जनजातियों में से एक है, जहाँ पुरुष की बजाय महिला प्रधान होती हैं। (भारत ने पाकिस्तान की बर्बरता का लिया बदला, 7 पाक सैनिक मारे)
इस जनजाति में लड़का पैदा होना बुरा माना जाता है ठीक वैसे ही जैसे भारत में पुरानी मानसिकता में लड़की पैदा होना माना जाता था। लड़की के जन्म पर यहां जश्न होता है तो वहीं लड़के के जन्म पर मातम। लड़कियों पर यहां कोई रोक टोक नहीं है जैसे पुरुषप्रधान मानसिकता में लड़कियों पर होती है। यहां लड़कियां धन और दौलत की वारिस होती है न की लड़के। यहां लड़की को जब पहला पीरियड आता है तो इस मौके पर भी जश्न मनाया जाता है।

इस जनजाति में महिलाओं का वर्चस्व है। वह कई पुरुषों से शादी कर सकती हैं। इतना ही नहीं, पुरुषों को अपने ससुराल में ही रहना पड़ता है। हालांकि, हाल के सालों में यहां कई पुरुषों ने इस प्रथा में बदलाव लाने की मांग की है। उनका कहना है कि वे महिलाओं को नीचा नहीं करना चाहते, बल्कि बराबरी का हक मांग रहे हैं। इस जनजाति में परिवार के तमाम फैसले लेने में भी महिलाओं को वर्चस्व हासिल है। इस समुदाय में बेटी के जन्म होने पर काफी जश्न मनाया जाता है, जबकि बेटे के जन्म लेने पर उतनी खुशी नहीं होती। इसके अलावा, यहां के बाजार और दुकानों पर भी महिलाएं ही काम करती हैं। बच्चों का सरनेम भी मां के नाम पर होता है।
खासी समुदाय में सबसे छोटी बेटी को विरासत का सबसे ज्यादा हिस्सा मिलता है। इस कारण से उसी को माता-पिता, अविवाहित भाई-बहनों और संपत्ति की देखभाल भी करनी पड़ती है। छोटी बेटी को खातडुह कहा जाता है। उसका घर हर रिश्तेदार के लिए खुला रहता है। इस समुदाय में लड़कियां बचपन में जानवरों के अंगों से खेलती हैं और उनका इस्तेमाल आभूषण के रूप में भी करती हैं।

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