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मर चुकी है इन्सानियत : तड़पते हुए मरते रहे स्टूडेंट्स, लोग खींचते रह गए फोटो

मर चुकी है इन्सानियत : तड़पते हुए मरते रहे स्टूडेंट्स, लोग खींचते रह गए फोटो
यहां हुए एक हादसे में तेजरफ्तार से चलती कार पेड़ से टकराने के बाद दो टुकड़ों में बंट गई थी। कार में बैठे पांच स्टूडेंट्स दर्द से तड़प रहे थे, लेकिन लोग मदद करने की बजाए अपने फोन से उनकी फोटो खींच रहे थे। जिस कारण हादसे के एक घंटे बाद चार स्टूडेंट्स की मौत हो गई थी। अगर उन्हें समय पर हॉस्पिटल ले जाया जाता तो शायद उनकी जान बच सकती थी। इस हादसे के बाद मृत रिषिका बस्सी की बहन ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां किया किया है। जिसमें उन्होंने लिखा है कि उनकी बहन समेत पांच बच्चे मर रहे थे और लोग फोटो खींच रहे थे। मदद मिल जाती तो जिंदा होती मेरी...

- हादसे में मृत रिषिका बस्सी की बहन असावरी भारद्वाज ने लिखा है 6 जनवरी की घटना के बाद मेरे परिवार को बड़ा झटका लगा।

- लुधियाना में कार एक्सिडेंट में मेरी बहन के साथ तीन स्टूडेंट मारे गए।

- असावरी लिखती हैं मैं अपना दर्द बयां नहीं कर सकती। लेकिन इससे भी ज्यादा दुख इस बात का है कि लोग दर्द से तड़प रहे स्टूडेंट्स की फोटोज खींच रहा थे लेकिन कोई उनकी मदद नहीं कर रहा था।

- मेरी बहन आखिरी सांस तक मां को फोन करने के लिए कह रही थी लेकिन वहां मौजूद सभी लोग फोटो और वीडियो बनाने और सोशल मीडिया पर पोस्ट करने में लगे हुए थे।

- अगर मेरी बहन को समय पर मदद मिल जाती जो वह आज जिंदा होती। लेकिन लोगों की जिंदगी सोशल मीडिया के कंट्रोल में है। हमारे लिए लाइक्स और शेयर्स ज्यादा जरूरी हो गए हैं।

एक घंटे तक जिंदा थे स्टूडेंट्स

- असावरी कहती हैं कि कोई एक इंसान मदद के लिए नहीं आया। हमारी दुनिया की स्थिति कितनी बुरी हो गई है। घटना पर मौजूद लोग सोशल मीडिया पर फोटोज पोस्ट कर बच्चों की जिंदगी के लिए दुआ मांग रहे थे, लेकिन वे घायलों की मदद भी तो कर सकते थे। हादसे के बाद स्टूडेंट्स एक घंटे तक जिंदा थे।

- जरा कल्पना कीजिए आप मुसीबत में हों और जिंदगी से जूझ रहे हों लेकिन मदद करने की बजाए पूरी दुनिया आपकी फोटोज खींच रही हो तो आपको कैसा लगेगा।

- असावरी लिखती हैं कि मैं लोगों से रिक्वेस्ट करती हूं कि वे अपने बच्चों को सावधानी से गाड़ी चलाना और लोगों की मदद करना सिखाएं।

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