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कोटा नगर निगम में 50 अफसरों के पद खाली, स्मार्ट सिटी में बदहाली.

तीन जोन में उपायुक्त पद खाली, बोर्ड की बैठक नहीं बुलाने पर आठ पार्षदों ने जताया आक्रोश
कोटा, 22 जून (हि.स.)। बारह लाख की आबादी वाले स्मार्ट सिटी कोटा में नगर निगम का ढांचा चरमरा जाने से आम जनता बदहाली के आंसू बहा रही है। जन शिकायतों पर लंबे समय से कोई सुनवाई नहीं होने से जनता में भारी आक्रोश है। शहर के 60 वार्डों में गंदगी के ढेर, अवरूद्ध नालियों एवं नालों की दुर्गंध से फैलती बीमारियां, सड़कों पर सरेआम घूमते आवारा मवेशियों से घायल होते नागरिक, हर जगह अतिक्रमियों को छूट मिलने से स्मार्ट सिटी की छवि धूमिल हो रही है। 

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नगर निगम में 60 निर्वाचित वार्ड पार्षद हैं, जिनका नेतृत्व भाजपा के महापौर महेश विजय एवं उपमहापौर सुनीता व्यास कर रही हैं। कोटा उत्तर से भाजपा के पार्षद बृजेश शर्मा नीटू, अतुल कौशल, इन्द्रकुमार जैन, विकास तंवर, राकेश पुटरा, चिमन बेरवा, निरज कुशवाह, सीताराम शर्मा ने शहर की चरमाराती व्यवस्था पर आक्रोश जताते हुए कहा कि पिछले एक वर्ष से निर्वाचित बोर्ड की बैठक नहीं हुई है। हालात यह है कि सरकार बदलने के बाद कोटा में तीन जोन के उपायुक्त के तबादले कर दिए गए लेकिन अभी तक उनके स्थान पर नए अधिकारी नियुक्त नहीं होने से हजारों नागरिक पेंशन, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, सार्वजनिक निर्माण कार्य ठप, जगह-जगह पशुपालकों के अतिक्रमण, बरसात में गंदगी, नालियां एवं नाले जाम होने जैसी समस्याओं को हल कराने के लिए विभागों में दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।

शहर की बदहाली पर जनता सिखाएगी सबक-
पार्षदों ने कहा कि तीन जोन के अफसरों के पद खाली होने से अंतिम समय में बोर्ड की बैठक तक स्थगित कर दी गई। आठ फरवरी,2018 को बजट बैठक के बाद से बोर्ड की बैठक नहीं होना लोकतांत्रिक व्यवस्था का मखौल उड़ाने जैसा कार्य है। नागरिक संगठनों ने कहा कि निर्वाचित महापौर एवं उपमहापौर शहर की समस्याओं पर आंख मूंद कर बैठे हैं। वार्डों की बदहाली के लिये जो भी जिम्मेदार हैं, जनता निगम चुनाव में उनको करारा जवाब देगी।

निगम की फाइलों पर धूल जमी-
भाजपा पार्षदों ने निगम के हालात इतने खराब हैं कि तीनों जोन में डिप्टी कमीश्नर नहीं हैं। एक अधिकारी के पास 8-8 विभागों के चार्ज हैं। सामाजिक सुरक्षा पेंशन के हजारों फार्म निगम की फाइलों में धूल खा रहे हैं। पार्षदों ने बताया कि उत्तर विधानसभा केे लिए 30 करोड़ रुपये  के विकास कार्यों में से मात्र चार से पांच करोड़ रुपये के कार्य पूरे हुए बाकी कार्यों पर निगम द्वारा रोक लगा दी गई। जून में शहर के सभी नालों की सफाई हो जाती थी लेकिन इस बार यह कार्य टेंडर में दबा हुआ है। शहर में पशुपालकों के अतिक्रमण एवं आवारा पशुओं के भय से सड़कों पर आए दिन नागरिक घायल हो रहे हैं। कोटा से 50 से अधिक सफाई कमचारियों के तबादले अन्य जिलों में कर दिए गए। तीनों जोन में डिप्टी कमिश्नर, सीएफओ सहित 50 महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं। निगम अधिकारी प्रेमशंकर शर्मा